श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.19

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

नारद उवाच

स इत्थं दैत्यपतिना परिपृष्टो महामुनिः।

स्मयमानस्तमभ्याह तद्वागमृतयन्त्रितः॥ १९

sa itthaṃ daityapatinā paripṛṣṭo mahāmuniḥ|

smayamānastamabhyāha tadvāgamṛtayantritaḥ|| 19

अर्थ

नारदजी कहते हैं—धर्मराज! जब प्रह्लादजीने महामुनि दत्तात्रेयजीसे इस प्रकार प्रश्न किया, तब वे उनकी अमृतमयी वाणीके वशीभूत हो मुसकराते हुए बोले॥ १९॥

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