॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.12.19
वन्यैश्चरुपुरोडाशान् निर्वपेत् ४ कालचोदितान्।
लब्धे नवे नवेऽन्नाद्ये पुराणं तु परित्यजेत्॥ १९
vanyaiścarupuroḍāśān nirvapet kālacoditān|
labdhe nave nave'nnādye purāṇaṃ tu parityajet|| 19
अर्थ
जंगलोंमें अपने-आप पैदा हुए धान्योंसे नित्य-नैमित्तिक चरु और पुरोडाशका हवन करे। जब नये-नये अन्न, फल, फूल आदि मिलने लगें, तब पहलेके इकट्ठे किये हुए अन्नका परित्याग कर दे॥ १९॥
टिप्पणियाँ
- ४
प्रा० पा०—पेन्नित्यनोदितान्।