श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.12.13

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

उषित्वैवं गुरुकुले द्विजोऽधीत्यावबुध्य च।

त्रयीं साङ्गोपनिषदं यावदर्थं यथाबलम्॥ १३

uṣitvaivaṃ gurukule dvijo'dhītyāvabudhya ca|

trayīṃ sāṅgopaniṣadaṃ yāvadarthaṃ yathābalam|| 13

अर्थ

इस प्रकार गुरुकुलमें निवास करके द्विजातिको अपनी शक्ति और आवश्यकताके अनुसार वेद, उनके अंग—शिक्षा, कल्प आदि और उपनिषदोंका अध्ययन तथा ज्ञान प्राप्त करना चाहिये॥ १३॥

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