श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.30

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

वृत्तिः सङ्करजातीनां तत्तत्कुलकृता भवेत्।

अचौराणामपापानामन्त्यजान्तेऽवसायिनाम्॥ ३०

vṛttiḥ saṅkarajātīnāṃ tattatkulakṛtā bhavet|

acaurāṇāmapāpānāmantyajānte'vasāyinām|| 30

अर्थ

युधिष्ठिर! जो चोरी तथा अन्यान्य पाप-कर्म नहीं करते—उन अन्त्यज तथा चाण्डाल आदि अन्तेवसायी वर्णसंकर जातियोंकी वृत्तियाँ वे ही हैं, जो कुल-परम्परासे उनके यहाँ चली आयी हैं॥ ३०॥

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