श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.29

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

या पतिं हरिभावेन भजेच्छ्रीरिव तत्परा।

हर्यात्मना हरेर्लोके पत्या श्रीरिव मोदते॥ २९

yā patiṃ haribhāvena bhajecchrīriva tatparā|

haryātmanā harerloke patyā śrīriva modate|| 29

अर्थ

जो लक्ष्मीजीके समान पतिपरायणा होकर अपने पतिकी उसे साक्षात् भगवान्‌का स्वरूप समझकर सेवा करती है, उसके पतिदेव वैकुण्ठलोकमें भगवत्सारूप्यको प्राप्त होते हैं और वह लक्ष्मीजीके समान उनके साथ आनन्दित होती है॥ २९॥

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