॥ श्रीहरिः ॥
कामैरुच्चावचैः साध्वी प्रश्रयेण दमेन च।
वाक्यैः सत्यैः प्रियैः प्रेम्णा काले काले भजेत् पतिम्॥ २७
kāmairuccāvacaiḥ sādhvī praśrayeṇa damena ca|
vākyaiḥ satyaiḥ priyaiḥ premṇā kāle kāle bhajet patim|| 27
अर्थ
अपने पतिदेवकी छोटी-बड़ी इच्छाओंको समयके अनुसार पूर्ण करे। विनय, इन्द्रिय-संयम, सत्य एवं प्रिय वचनोंसे प्रेमपूर्वक पतिदेवकी सेवा करे॥ २७॥
कामैरुच्चावचैः साध्वी प्रश्रयेण दमेन च।
वाक्यैः सत्यैः प्रियैः प्रेम्णा काले काले भजेत् पतिम्॥ २७
अपने पतिदेवकी छोटी-बड़ी इच्छाओंको समयके अनुसार पूर्ण करे। विनय, इन्द्रिय-संयम, सत्य एवं प्रिय वचनोंसे प्रेमपूर्वक पतिदेवकी सेवा करे॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.11.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 877) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/11/27/