श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.11.18

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

ऋतामृताभ्यां जीवेत मृतेन प्रमृतेन वा।

सत्यानृताभ्यां जीवेत न श्‍ववृत्त्या कथञ्चन॥ १८

ṛtāmṛtābhyāṃ jīveta mṛtena pramṛtena vā|

satyānṛtābhyāṃ jīveta na śvavṛttyā kathañcana|| 18

अर्थ

ऋत, अमृत, मृत, प्रमृत और सत्यानृत—इनमेंसे किसी भी वृत्तिका आश्रय ले, परन्तु श्वानवृत्तिका अवलम्बन कभी न करे॥ १८॥

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