॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.10.66
धर्मज्ञानविरक्त्यृद्धितपोविद्याक्रियादिभिः।
रथं सूतं ध्वजं वाहान्धनुर्वर्म शरादि यत्॥ ६६
dharmajñānaviraktyṛddhitapovidyākriyādibhiḥ|
rathaṃ sūtaṃ dhvajaṃ vāhāndhanurvarma śarādi yat|| 66
अर्थ
उन्होंने धर्मसे रथ, ज्ञानसे सारथि, वैराग्यसे ध्वजा, ऐश्वर्यसे घोड़े, तपस्यासे धनुष, विद्यासे कवच, क्रियासे बाण और अपनी अन्यान्य शक्तियोंसे अन्यान्य वस्तुओंका निर्माण किया॥ ६६॥