श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.59

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तैः स्पृष्टा व्यसवः सर्वे निपेतुः स्म पुरौकसः।

तानानीय महायोगी मयः कूपरसेऽक्षिपत्॥ ५९

taiḥ spṛṣṭā vyasavaḥ sarve nipetuḥ sma puraukasaḥ|

tānānīya mahāyogī mayaḥ kūparase'kṣipat|| 59

अर्थ

उनके स्पर्शसे सभी विमानवासी निष्प्राण होकर गिर पड़े। महामायावी मय बहुत-से उपाय जानता था, वह उन दैत्योंको उठा लाया और अपने बनाये हुए अमृतके कुएँमें डाल दिया॥ ५९॥

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