॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.10.54
स निर्माय पुरस्तिस्रो हैमीरौप्यायसीर्विभुः।
दुर्लक्ष्यापायसंयोगा दुर्वितर्क्यपरिच्छदाः॥ ५४
sa nirmāya purastisro haimīraupyāyasīrvibhuḥ|
durlakṣyāpāyasaṃyogā durvitarkyaparicchadāḥ|| 54
अर्थ
शक्तिशाली मयासुरने सोने, चाँदी और लोहेके तीन विमान बना दिये। वे विमान क्या थे, तीन पुर ही थे। वे इतने विलक्षण थे कि उनका आना-जाना जान नहीं पड़ता था। उनमें अपरिमित सामग्रियाँ भरी हुई थीं॥ ५४॥