श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.45

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

धर्मो भागवतानां च भगवान्येन गम्यते।

आख्यानेऽस्मिन्समाम्नातमाध्यात्मिकमशेषतः॥ ४५

dharmo bhāgavatānāṃ ca bhagavānyena gamyate|

ākhyāne'sminsamāmnātamādhyātmikamaśeṣataḥ|| 45

अर्थ

जिसके द्वारा भगवान्‌की प्राप्ति होती है, उस भागवत-धर्मका भी वर्णन है। अध्यात्मके सम्बन्धमें भी सभी जाननेयोग्य बातें इसमें हैं॥ ४५॥✎ 632

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #632 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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