॥ श्रीहरिः ॥
हिरण्यकशिपुः पुत्रं प्रह्रादं केशवप्रियम्।
जिघांसुरकरोन्नाना यातना मृत्युहेतवे॥ ४१
hiraṇyakaśipuḥ putraṃ prahrādaṃ keśavapriyam|
jighāṃsurakaronnānā yātanā mṛtyuhetave|| 41
अर्थ
हिरण्यकशिपुने अपने पुत्र प्रह्लादको भगवत्प्रेमी होनेके कारण मार डालना चाहा और इसके लिये उन्हें बहुत-सी यातनाएँ दीं॥ ४१॥
हिरण्यकशिपुः पुत्रं प्रह्रादं केशवप्रियम्।
जिघांसुरकरोन्नाना यातना मृत्युहेतवे॥ ४१
हिरण्यकशिपुने अपने पुत्र प्रह्लादको भगवत्प्रेमी होनेके कारण मार डालना चाहा और इसके लिये उन्हें बहुत-सी यातनाएँ दीं॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 810) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/1/41/