विष्णुभगवान्ने नृसिंहका रूप धारण करके हिरण्यकशिपुको और पृथ्वीका उद्धार करनेके समय वराहावतार ग्रहण करके हिरण्याक्षको मारा॥ ४०॥✎ 577
हतो हिरण्यकशिपुर्हरिणा सिंहरूपिणा।
हिरण्याक्षो धरोद्धारे बिभ्रता सौकरं वपुः॥ ४०
विष्णुभगवान्ने नृसिंहका रूप धारण करके हिरण्यकशिपुको और पृथ्वीका उद्धार करनेके समय वराहावतार ग्रहण करके हिरण्याक्षको मारा॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 809) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/40/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#577 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्ने