श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.3

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

इति नः सुमहाभाग नारायणगुणान् प्रति।

संशयः सुमहाञ्जातस्तद्भवांश्छेत्तुमर्हति॥ ३

iti naḥ sumahābhāga nārāyaṇaguṇān prati|

saṃśayaḥ sumahāñjātastadbhavāṃśchettumarhati|| 3

अर्थ

भगवत्प्रेमके सौभाग्यसे सम्पन्‍न महात्मन्! हमारे चित्तमें भगवान्‌के समत्व आदि गुणोंके सम्बन्धमें बड़ा भारी सन्देह हो रहा है। आप कृपा करके उसे मिटाइये॥ ३॥

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