श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.17

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

दमघोषसुतः पाप आरभ्य कलभाषणात्।

सम्प्रत्यमर्षी गोविन्दे दन्तवक्‍त्रश्‍च दुर्मतिः॥ १७

damaghoṣasutaḥ pāpa ārabhya kalabhāṣaṇāt|

sampratyamarṣī govinde dantavaktraśca durmatiḥ|| 17

अर्थ

यह दमघोषका लड़का पापात्मा शिशुपाल और दुर्बुद्धि दन्तवक्‍त्र—दोनों ही जबसे तुतलाकर बोलने लगे थे, तबसे अबतक भगवान्‌से द्वेष ही करते रहे हैं॥ १७॥✎ 564 565 566 567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #564 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #565 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #566 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #567 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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