नारदजी! इसका रहस्य हम सभी जानना चाहते हैं। पूर्वकालमें भगवान्की निन्दा करनेके कारण ऋषियोंने राजा वेनको नरकमें डाल दिया था॥ १६॥✎ 564565566567
एतद्वेदितुमिच्छामः सर्व एव वयं मुने।
भगवन्निन्दया वेनो द्विजैस्तमसि पातितः॥ १६
नारदजी! इसका रहस्य हम सभी जानना चाहते हैं। पूर्वकालमें भगवान्की निन्दा करनेके कारण ऋषियोंने राजा वेनको नरकमें डाल दिया था॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 807) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)