॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.8.37
न कुतश्चिद् भयं तस्य विद्यां धारयतो भवेत्।
राजदस्युग्रहादिभ्यो व्याघ्रादिभ्यश्च कर्हिचित्॥ ३७
na kutaścid bhayaṃ tasya vidyāṃ dhārayato bhavet|
rājadasyugrahādibhyo vyāghrādibhyaśca karhicit|| 37
अर्थ
जो इस वैष्णवी विद्याको धारण कर लेता है, उसे राजा, डाकू, प्रेत-पिशाचादि और बाघ आदि हिंसक जीवोंसे कभी किसी प्रकारका भय नहीं होता॥ ३७॥