padā vā saṃspṛśet sadyaḥ sādhvasāt sa vimucyate|| 36
अर्थ
इस नारायणकवचको धारण करनेवाला पुरुष जिसको भी अपने नेत्रोंसे देख लेता अथवा पैरसे छू देता है, वह तत्काल समस्त भयोंसे मुक्त हो जाता है॥ ३६॥
एतद् धारयमाणस्तु यं यं पश्यति चक्षुषा।
पदा वा संस्पृशेत् सद्यः साध्वसात् स विमुच्यते॥ ३६
इस नारायणकवचको धारण करनेवाला पुरुष जिसको भी अपने नेत्रोंसे देख लेता अथवा पैरसे छू देता है, वह तत्काल समस्त भयोंसे मुक्त हो जाता है॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.8.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 743) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/8/36/