देवराज! प्राचीन कालकी बात है, एक कौशिकगोत्री ब्राह्मणने इस विद्याको धारण करके योगधारणासे अपना शरीर मरुभूमिमें त्याग दिया॥ ३८॥
इमां विद्यां पुरा कश्चित् कौशिको धारयन् द्विजः।
योगधारणया स्वाङ्गं जहौ स मरुधन्वनि॥ ३८
देवराज! प्राचीन कालकी बात है, एक कौशिकगोत्री ब्राह्मणने इस विद्याको धारण करके योगधारणासे अपना शरीर मरुभूमिमें त्याग दिया॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.8.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 743) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/8/38/