॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.8.34
विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्ता-
दन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन
स्वतेजसा ग्रस्तसमस्ततेजाः॥ ३४
vidikṣu dikṣūrdhvamadhaḥ samantā-
dantarbahirbhagavān nārasiṃhaḥ|
prahāpayam̐llokabhayaṃ svanena
svatejasā grastasamastatejāḥ|| 34
अर्थ
जो अपने भयंकर अट्टाहाससे सब लोगोंके भयको भगा देते हैं और अपने तेजसे सबका तेज ग्रस लेते हैं, वे भगवान् नृसिंह दिशा-विदिशामें, नीचे-ऊपर, बाहर-भीतर—सब ओर हमारी रक्षा करें’॥ ३४॥