श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.29

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

आचार्यो ब्रह्मणो मूर्तिः पिता मूर्तिः प्रजापतेः।

भ्राता मरुत्पतेर्मूर्तिर्माता साक्षात् क्षितेस्तनुः॥ २९

ācāryo brahmaṇo mūrtiḥ pitā mūrtiḥ prajāpateḥ|

bhrātā marutpatermūrtirmātā sākṣāt kṣitestanuḥ|| 29

अर्थ

वत्स! आचार्य वेदकी, पिता ब्रह्माजीकी, भाई इन्द्रकी और माता साक्षात् पृथ्वीकी मूर्ति होती है॥ २९॥

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