श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

दयाया भगिनी मूर्तिर्धर्मस्यात्मातिथिः स्वयम्।

अग्नेरभ्यागतो मूर्तिः सर्वभूतानि चात्मनः॥ ३०

dayāyā bhaginī mūrtirdharmasyātmātithiḥ svayam|

agnerabhyāgato mūrtiḥ sarvabhūtāni cātmanaḥ|| 30

अर्थ

(इसी प्रकार) बहिन दयाकी, अतिथि धर्मकी, अभ्यागत अग्‍निकी और जगत‍्के सभी प्राणी अपने आत्माकी ही मूर्ति—आत्मस्वरूप होते हैं॥ ३०॥

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