श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.21

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ब्रह्मोवाच

अहो बत सुरश्रेष्ठ ह्यभद्रं वः कृतं महत्।

ब्रह्मिष्ठं ब्राह्मणं दान्तमैश्‍वर्यान्‍नाभ्यनन्दत॥ २१

aho bata suraśreṣṭha hyabhadraṃ vaḥ kṛtaṃ mahat|

brahmiṣṭhaṃ brāhmaṇaṃ dāntamaiśvaryānnābhyanandata|| 21

अर्थ

ब्रह्माजीने कहा—देवताओ! यह बड़े खेदकी बात है। सचमुच तुमलोगोंने बहुत बुरा काम किया। हरे, हरे! तुमलोगोंने ऐश्‍वर्यके मदसे अंधे होकर ब्रह्मज्ञानी, वेदज्ञ एवं संयमी ब्राह्मणका सत्कार नहीं किया॥ २१॥

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