प्रक्षीणेभ्यः स्ववैरिभ्यः समृद्धानां च यत् सुराः॥ २२
tasyāyamanayasyāsīt parebhyo vaḥ parābhavaḥ|
prakṣīṇebhyaḥ svavairibhyaḥ samṛddhānāṃ ca yat surāḥ|| 22
अर्थ
देवताओ! तुम्हारी उसी अनीतिका यह फल है कि आज समृद्धिशाली होनेपर भी तुम्हें अपने निर्बल शत्रुओंके सामने नीचा देखना पड़ा॥ २२॥
तस्यायमनयस्यासीत् परेभ्यो वः पराभवः।
प्रक्षीणेभ्यः स्ववैरिभ्यः समृद्धानां च यत् सुराः॥ २२
देवताओ! तुम्हारी उसी अनीतिका यह फल है कि आज समृद्धिशाली होनेपर भी तुम्हें अपने निर्बल शत्रुओंके सामने नीचा देखना पड़ा॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 736) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/22/