शबलाश्वोंने वहाँ जाकर उस सरोवरमें स्नान किया। स्नानमात्रसे ही उनके अन्तःकरणके सारे मल धुल गये। अब वे परब्रह्मस्वरूप प्रणवका जप करते हुए महान् तपस्यामें लग गये॥ २६॥✎ 513
तदुपस्पर्शनादेव विनिर्धूतमलाशयाः।
जपन्तो ब्रह्म परमं तेपुस्तेऽत्र महत् तपः॥ २६
शबलाश्वोंने वहाँ जाकर उस सरोवरमें स्नान किया। स्नानमात्रसे ही उनके अन्तःकरणके सारे मल धुल गये। अब वे परब्रह्मस्वरूप प्रणवका जप करते हुए महान् तपस्यामें लग गये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 727) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)