राजन्! दक्षके ये सभी पुत्र एक आचरण और एक स्वभावके थे। जब उनके पिता दक्षने उन्हें सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी, तब वे तपस्या करनेके विचारसे पश्चिम दिशाकी ओर गये॥ २॥
अपृथग्धर्मशीलास्ते सर्वे दाक्षायणा नृप।
पित्रा प्रोक्ताः प्रजासर्गे प्रतीचीं प्रययुर्दिशम्॥ २
राजन्! दक्षके ये सभी पुत्र एक आचरण और एक स्वभावके थे। जब उनके पिता दक्षने उन्हें सन्तान उत्पन्न करनेकी आज्ञा दी, तब वे तपस्या करनेके विचारसे पश्चिम दिशाकी ओर गये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 724) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/2/