पश्चिम दिशामें सिन्धुनदी और समुद्रके संगमपर नारायण-सर नामका एक महान् तीर्थ है। बड़े-बड़े मुनि और सिद्ध पुरुष वहाँ निवास करते हैं॥ ३॥
तत्र नारायणसरस्तीर्थं सिन्धुसमुद्रयोः।
सङ्गमो यत्र सुमहन्मुनिसिद्धनिषेवितम्॥ ३
पश्चिम दिशामें सिन्धुनदी और समुद्रके संगमपर नारायण-सर नामका एक महान् तीर्थ है। बड़े-बड़े मुनि और सिद्ध पुरुष वहाँ निवास करते हैं॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 724) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/3/