caturbhiradbhutaiḥ siddhairājñā te vipralambhitā|| 8
अर्थ
प्रभो! अबतक संसारमें कहीं भी आपके द्वारा नियत किये हुए दण्डकी अवहेलना नहीं हुई थी; किन्तु इस समय चार अद्भुत सिद्धोंने आपकी आज्ञाका उल्लंघन कर दिया है॥ ८॥
तस्य ते विहतो दण्डो न लोके वर्ततेऽधुना।
चतुर्भिरद्भुतैः सिद्धैराज्ञा ते विप्रलम्भिता॥ ८
प्रभो! अबतक संसारमें कहीं भी आपके द्वारा नियत किये हुए दण्डकी अवहेलना नहीं हुई थी; किन्तु इस समय चार अद्भुत सिद्धोंने आपकी आज्ञाका उल्लंघन कर दिया है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 712) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/3/8/