श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अतस्त्वमेको भूतानां सेश्‍वराणामधीश्‍वरः।

शास्ता दण्डधरो नॄणां शुभाशुभविवेचनः॥ ७✎ 1070

atastvameko bhūtānāṃ seśvarāṇāmadhīśvaraḥ|

śāstā daṇḍadharo nṝṇāṃ śubhāśubhavivecanaḥ|| 7

अर्थ

इसलिये हम तो ऐसा समझते हैं कि अकेले आप ही समस्त प्राणियों और उनके स्वामियोंके भी अधीश्‍वर हैं। आप ही मनुष्योंके पाप और पुण्यके निर्णायक, दण्डदाता और शासक हैं॥ ७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1070 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नृणां → नॄणां

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