श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

नीयमानं तवादेशादस्माभिर्यातनागृहान्।

व्यमोचयन् पातकिनं छित्त्वा पाशान् प्रसह्य ते॥ ९

nīyamānaṃ tavādeśādasmābhiryātanāgṛhān|

vyamocayan pātakinaṃ chittvā pāśān prasahya te|| 9

अर्थ

प्रभो! आपकी आज्ञासे हमलोग एक पापीको यातनागृहकी ओर ले जा रहे थे, परन्तु उन्होंने बलपूर्वक आपके फंदे काटकर उसे छुड़ा दिया॥ ९॥

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