यमराजने कहा—दूतो! मेरे अतिरिक्त एक और ही चराचर जगत्के स्वामी हैं। उन्हींमें यह सम्पूर्ण जगत् सूतमें वस्त्रके समान ओत-प्रोत है। उन्हींके अंश ब्रह्मा, विष्णु और शंकर इस जगत्की उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय करते हैं। उन्हींने इस सारे जगत्को नथे हुए बैलके समान अपने अधीन कर रखा है॥ १२॥✎ 50013621363
परो मदन्यो जगतस्तस्थुषश्च
ओतं प्रोतं पटवद्यत्र विश्वम्।
यदंशतोऽस्य स्थितिजन्मनाशा
नस्योतवद् यस्य वशे च लोकः॥ १२
यमराजने कहा—दूतो! मेरे अतिरिक्त एक और ही चराचर जगत्के स्वामी हैं। उन्हींमें यह सम्पूर्ण जगत् सूतमें वस्त्रके समान ओत-प्रोत है। उन्हींके अंश ब्रह्मा, विष्णु और शंकर इस जगत्की उत्पत्ति, स्थिति तथा प्रलय करते हैं। उन्हींने इस सारे जगत्को नथे हुए बैलके समान अपने अधीन कर रखा है॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 713) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/3/12/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)