श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब दूतोंने इस प्रकार प्रश्न किया, तब देवशिरोमणि प्रजाके शासक भगवान् यमराजने प्रसन्न होकर श्रीहरिके चरणकमलोंका स्मरण करते हुए उनसे कहा॥ ११॥
इति देवः स आपृष्टः प्रजासंयमनो यमः।
प्रीतः स्वदूतान् प्रत्याह स्मरन् पादाम्बुजं हरेः॥ ११
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—जब दूतोंने इस प्रकार प्रश्न किया, तब देवशिरोमणि प्रजाके शासक भगवान् यमराजने प्रसन्न होकर श्रीहरिके चरणकमलोंका स्मरण करते हुए उनसे कहा॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 713) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/3/11/