परीक्षित्! जो सब प्रकारकी सम्पत्तियोंको प्राप्त करना चाहता हो, उसे चाहिये कि प्रतिदिन भक्तिभावसे भगवान् लक्ष्मीनारायणकी पूजा करे; क्योंकि वे ही दोनों समस्त अभिलाषाओंके पूर्ण करनेवाले एवं श्रेष्ठ वरदानी हैं॥ ९॥
श्रियं विष्णुं च वरदावाशिषां प्रभवावुभौ।
भक्त्या सम्पूजयेन्नित्यं यदीच्छेत्सर्वसम्पदः॥ ९
परीक्षित्! जो सब प्रकारकी सम्पत्तियोंको प्राप्त करना चाहता हो, उसे चाहिये कि प्रतिदिन भक्तिभावसे भगवान् लक्ष्मीनारायणकी पूजा करे; क्योंकि वे ही दोनों समस्त अभिलाषाओंके पूर्ण करनेवाले एवं श्रेष्ठ वरदानी हैं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 802) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/19/9/