oṃ namo bhagavate mahāpuruṣāya mahāvibhūtipataye svāheti|| 8
अर्थ
जो नैवेद्य बच रहे, उससे ‘ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाविभूतिपतये स्वाहा।’ ‘महान् ऐश्वर्योंके अधिपति भगवान् पुरुषोत्तमको नमस्कार है। मैं उन्हींके लिये इस हविष्यका हवन कर रही हूँ।’—यह मन्त्र बोलकर अग्निमें बारह आहुतियाँ दे॥ ८॥
हविःशेषं तु जुहुयादनले द्वादशाहुतीः।
ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाविभूतिपतये स्वाहेति॥ ८
जो नैवेद्य बच रहे, उससे ‘ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाविभूतिपतये स्वाहा।’ ‘महान् ऐश्वर्योंके अधिपति भगवान् पुरुषोत्तमको नमस्कार है। मैं उन्हींके लिये इस हविष्यका हवन कर रही हूँ।’—यह मन्त्र बोलकर अग्निमें बारह आहुतियाँ दे॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 802) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/19/8/