श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

हविःशेषं तु जुहुयादनले द्वादशाहुतीः।

ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाविभूतिपतये स्वाहेति॥ ८

haviḥśeṣaṃ tu juhuyādanale dvādaśāhutīḥ|

oṃ namo bhagavate mahāpuruṣāya mahāvibhūtipataye svāheti|| 8

अर्थ

जो नैवेद्य बच रहे, उससे ‘ॐ नमो भगवते महापुरुषाय महाविभूतिपतये स्वाहा।’ ‘महान् ऐश्‍वर्योंके अधिपति भगवान् पुरुषोत्तमको नमस्कार है। मैं उन्हींके लिये इस हविष्यका हवन कर रही हूँ।’—यह मन्त्र बोलकर अग्‍निमें बारह आहुतियाँ दे॥ ८॥

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