‘हे लक्ष्मीनारायण! आप दोनों सर्वव्यापक और सम्पूर्ण चराचर जगत्के अन्तिम कारण हैं—आपका और कोई कारण नहीं है। भगवन्! माता लक्ष्मीजी आपकी मायाशक्ति हैं। ये ही स्वयं अव्यक्त प्रकृति भी हैं। इनका पार पाना अत्यन्त कठिन है॥ ११॥
युवां तु विश्वस्य विभू जगतः कारणं परम्।
इयं हि प्रकृतिः सूक्ष्मा मायाशक्तिर्दुरत्यया॥ ११
‘हे लक्ष्मीनारायण! आप दोनों सर्वव्यापक और सम्पूर्ण चराचर जगत्के अन्तिम कारण हैं—आपका और कोई कारण नहीं है। भगवन्! माता लक्ष्मीजी आपकी मायाशक्ति हैं। ये ही स्वयं अव्यक्त प्रकृति भी हैं। इनका पार पाना अत्यन्त कठिन है॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 802) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/19/11/