श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.12

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

तस्या अधीश्‍वरः साक्षात्त्वमेव पुरुषः परः।

त्वं सर्वयज्ञ इज्येयं क्रियेयं फलभुग्भवान्॥ १२

tasyā adhīśvaraḥ sākṣāttvameva puruṣaḥ paraḥ|

tvaṃ sarvayajña ijyeyaṃ kriyeyaṃ phalabhugbhavān|| 12

अर्थ

प्रभो! आप ही इन महामायाके अधीश्‍वर हैं और आप ही स्वयं परमपुरुष हैं। आप समस्त यज्ञ हैं और ये हैं यज्ञ-क्रिया। आप फलके भोक्ता हैं और ये हैं उसको उत्पन्‍न करनेवाली क्रिया॥ १२॥

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