मेरी स्नेहमयी जननी! तुम सब प्रकार मेरी पूज्या हो। मैंने मूर्खतावश बड़ी दुष्टताका काम किया है। तुम मेरे अपराधको क्षमा कर दो। यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि तुम्हारा गर्भ खण्ड-खण्ड हो जानेसे एक प्रकार मर जानेपर भी फिरसे जीवित हो गया॥ ७६॥✎ 1364
तदिदं मम दौर्जन्यं बालिशस्य महीयसि।
क्षन्तुमर्हसि मातस्त्वं दिष्ट्या गर्भो मृतोत्थितः॥ ७६
मेरी स्नेहमयी जननी! तुम सब प्रकार मेरी पूज्या हो। मैंने मूर्खतावश बड़ी दुष्टताका काम किया है। तुम मेरे अपराधको क्षमा कर दो। यह बड़े सौभाग्यकी बात है कि तुम्हारा गर्भ खण्ड-खण्ड हो जानेसे एक प्रकार मर जानेपर भी फिरसे जीवित हो गया॥ ७६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.76 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 800) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/76/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)