ये तु नेच्छन्त्यपि परं ते स्वार्थकुशलाः स्मृताः॥ ७४
ārādhanaṃ bhagavata īhamānā nirāśiṣaḥ|
ye tu necchantyapi paraṃ te svārthakuśalāḥ smṛtāḥ|| 74
अर्थ
जो लोग निष्कामभावसे भगवान्की आराधना करते हैं और दूसरी वस्तुओंकी तो बात ही क्या, मोक्षकी भी इच्छा नहीं करते, वे ही अपने स्वार्थ और परमार्थमें निपुण हैं॥ ७४॥✎ 554555
आराधनं भगवत ईहमाना निराशिषः।
ये तु नेच्छन्त्यपि परं ते स्वार्थकुशलाः स्मृताः॥ ७४
जो लोग निष्कामभावसे भगवान्की आराधना करते हैं और दूसरी वस्तुओंकी तो बात ही क्या, मोक्षकी भी इच्छा नहीं करते, वे ही अपने स्वार्थ और परमार्थमें निपुण हैं॥ ७४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.74 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 800) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/74/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)