श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.73

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

ततस्तत्परमाश्‍चर्यं वीक्ष्याध्यवसितं मया।

महापुरुषपूजायाः सिद्धिः काप्यनुषङ्गिणी॥ ७३

tatastatparamāścaryaṃ vīkṣyādhyavasitaṃ mayā|

mahāpuruṣapūjāyāḥ siddhiḥ kāpyanuṣaṅgiṇī|| 73

अर्थ

यह परम आश्‍चर्यमयी घटना देखकर मैंने ऐसा निश्‍चय किया कि परमपुरुष भगवान्‌की उपासनाकी यह कोई स्वाभाविक सिद्धि है॥ ७३॥✎ 554 555

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #554 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #555 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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