श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.12

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

हिरण्यकशिपोर्भार्या कयाधुर्नाम दानवी।

जम्भस्य तनया दत्ता सुषुवे चतुरः सुतान्॥ १२

hiraṇyakaśiporbhāryā kayādhurnāma dānavī|

jambhasya tanayā dattā suṣuve caturaḥ sutān|| 12

अर्थ

हिरण्यकशिपुकी पत्‍नी दानवी कयाधु थी। उसके पिता जम्भने उसका विवाह हिरण्यकशिपुसे कर दिया था। कयाधुके चार पुत्र हुए—संह्राद, अनुह्राद, ह्राद और प्रह्राद। इनकी सिंहिका नामकी एक बहिन भी थी। उसका विवाह विप्रचित्ति नामक दानवसे हुआ। उससे राहु नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई॥ १२-१३॥✎ 550

यह अर्थ श्लोक 12–13 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #550 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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