॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.18.12
हिरण्यकशिपोर्भार्या कयाधुर्नाम दानवी।
जम्भस्य तनया दत्ता सुषुवे चतुरः सुतान्॥ १२
hiraṇyakaśiporbhāryā kayādhurnāma dānavī|
jambhasya tanayā dattā suṣuve caturaḥ sutān|| 12
अर्थ
हिरण्यकशिपुकी पत्नी दानवी कयाधु थी। उसके पिता जम्भने उसका विवाह हिरण्यकशिपुसे कर दिया था। कयाधुके चार पुत्र हुए—संह्राद, अनुह्राद, ह्राद और प्रह्राद। इनकी सिंहिका नामकी एक बहिन भी थी। उसका विवाह विप्रचित्ति नामक दानवसे हुआ। उससे राहु नामक पुत्रकी उत्पत्ति हुई॥ १२-१३॥✎ 550