॥ श्रीहरिः ॥
दितेर्द्वावेव दायादौ दैत्यदानववन्दितौ।
हिरण्यकशिपुर्नाम हिरण्याक्षश्च कीर्तितौ॥ ११
diterdvāveva dāyādau daityadānavavanditau|
hiraṇyakaśipurnāma hiraṇyākṣaśca kīrtitau|| 11
अर्थ
दितिके दैत्य और दानवोंके वन्दनीय दो ही पुत्र हुए—हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। इनकी संक्षिप्त कथा मैं तुम्हें (तीसरे स्कन्धमें) सुना चुका हूँ॥ ११॥
दितेर्द्वावेव दायादौ दैत्यदानववन्दितौ।
हिरण्यकशिपुर्नाम हिरण्याक्षश्च कीर्तितौ॥ ११
दितिके दैत्य और दानवोंके वन्दनीय दो ही पुत्र हुए—हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। इनकी संक्षिप्त कथा मैं तुम्हें (तीसरे स्कन्धमें) सुना चुका हूँ॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 792) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/11/