श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.28

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

ततश्‍च सप्तरात्रान्ते विद्यया धार्यमाणया।

विद्याधराधिपत्यं स लेभेऽप्रतिहतं नृपः॥ २८

tataśca saptarātrānte vidyayā dhāryamāṇayā|

vidyādharādhipatyaṃ sa lebhe'pratihataṃ nṛpaḥ|| 28

अर्थ

तदनन्तर उस विद्याके अनुष्ठानसे सात रातके पश्चात् राजा चित्रकेतुको विद्याधरोंका अखण्ड आधिपत्य प्राप्त हुआ॥ २८॥

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