॥ श्रीहरिः ॥
चरन्ति ह्यवनौ कामं ब्राह्मणा भगवत्प्रियाः।
मादृशां ग्राम्यबुद्धीनां बोधायोन्मत्तलिङ्गिनः॥ ११
caranti hyavanau kāmaṃ brāhmaṇā bhagavatpriyāḥ|
mādṛśāṃ grāmyabuddhīnāṃ bodhāyonmattaliṅginaḥ|| 11
अर्थ
मैं जानता हूँ कि बहुत-से भगवान्के प्यारे ब्रह्मवेत्ता मेरे-जैसे विषयासक्त प्राणियोंको उपदेश करनेके लिये उन्मत्तका-सा वेष बनाकर पृथ्वीपर स्वच्छन्द विचरण करते हैं॥ ११॥
चरन्ति ह्यवनौ कामं ब्राह्मणा भगवत्प्रियाः।
मादृशां ग्राम्यबुद्धीनां बोधायोन्मत्तलिङ्गिनः॥ ११
मैं जानता हूँ कि बहुत-से भगवान्के प्यारे ब्रह्मवेत्ता मेरे-जैसे विषयासक्त प्राणियोंको उपदेश करनेके लिये उन्मत्तका-सा वेष बनाकर पृथ्वीपर स्वच्छन्द विचरण करते हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.15.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 776) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/15/11/