राजा चित्रकेतु बोले—आप दोनों परम ज्ञानवान् और महान्से भी महान् जान पड़ते हैं तथा अपनेको अवधूतवेषमें छिपाकर यहाँ आये हैं। कृपा करके बतलाइये, आपलोग हैं कौन?॥ १०॥
कौ युवां ज्ञानसम्पन्नौ महिष्ठौ च महीयसाम्।
अवधूतेन वेषेण गूढाविह समागतौ॥ १०
राजा चित्रकेतु बोले—आप दोनों परम ज्ञानवान् और महान्से भी महान् जान पड़ते हैं तथा अपनेको अवधूतवेषमें छिपाकर यहाँ आये हैं। कृपा करके बतलाइये, आपलोग हैं कौन?॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.15.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 776) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/15/10/