श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.15.12

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

कुमारो नारद ऋभुरङ्गिरा देवलोऽसितः।

अपान्तरतमो व्यासो मार्कण्डेयोऽथ गौतमः॥ १२

kumāro nārada ṛbhuraṅgirā devalo'sitaḥ|

apāntaratamo vyāso mārkaṇḍeyo'tha gautamaḥ|| 12

अर्थ

सनत्कुमार, नारद, ऋभु, अंगिरा, देवल, असित, अपान्तरतम व्यास, मार्कण्डेय, गौतम, वसिष्ठ, भगवान् परशुराम, कपिलदेव, शुकदेव, दुर्वासा, याज्ञवल्क्य, जातूकर्ण्य, आरुणि, रोमश, च्यवन, दत्तात्रेय, आसुरि, पतंजलि, वेदशिरा, बोध्यमुनि, पंचशिरा, हिरण्यनाभ, कौसल्य, श्रुतदेव और ऋतध्वज—ये सब तथा दूसरे सिद्धेश्‍वर ऋषि-मुनि ज्ञानदान करनेके लिये पृथ्वीपर विचरते रहते हैं॥ १२—१५॥

यह अर्थ श्लोक 12–15 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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