श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.10

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

यथा दारुमयी नारी यथा यन्त्रमयो मृगः।

एवं भूतानि मघवन्‍नीशतन्त्राणि विद्धि भोः॥ १०

yathā dārumayī nārī yathā yantramayo mṛgaḥ|

evaṃ bhūtāni maghavannīśatantrāṇi viddhi bhoḥ|| 10

अर्थ

इन्द्र! जैसे काठकी पुतली और यन्त्रका हरिण नचानेवालेके हाथमें होते हैं, वैसे ही तुम समस्त प्राणियोंको भगवान्‌के अधीन समझो॥ १०॥

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