श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.12.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

ओजः सहो बलं प्राणममृतं मृत्युमेव च।

तमज्ञाय जनो हेतुमात्मानं मन्यते जडम्॥ ९

ojaḥ saho balaṃ prāṇamamṛtaṃ mṛtyumeva ca|

tamajñāya jano hetumātmānaṃ manyate jaḍam|| 9

अर्थ

वही काल मनुष्यके मनोबल, इन्द्रियबल, शरीरबल, प्राण, जीवन और मृत्युके रूपमें स्थित है। मनुष्य उसे न जानकर जड़ शरीरको ही जय-पराजय आदिका कारण समझता है॥ ९॥

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