॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.12.9
ओजः सहो बलं प्राणममृतं मृत्युमेव च।
तमज्ञाय जनो हेतुमात्मानं मन्यते जडम्॥ ९
ojaḥ saho balaṃ prāṇamamṛtaṃ mṛtyumeva ca|
tamajñāya jano hetumātmānaṃ manyate jaḍam|| 9
अर्थ
वही काल मनुष्यके मनोबल, इन्द्रियबल, शरीरबल, प्राण, जीवन और मृत्युके रूपमें स्थित है। मनुष्य उसे न जानकर जड़ शरीरको ही जय-पराजय आदिका कारण समझता है॥ ९॥