श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.51

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तां शशंसुर्जना राज्ञीं दिष्ट्या ते पुत्र आर्तिहा।

प्रतिलब्धश्चिरं नष्टो रक्षिता मण्डलं भुवः॥ ५१

tāṃ śaśaṃsurjanā rājñīṃ diṣṭyā te putra ārtihā|

pratilabdhaściraṃ naṣṭo rakṣitā maṇḍalaṃ bhuvaḥ|| 51

अर्थ

उस समय पुरवासी लोग उनकी प्रशंसा करते हुए कहने लगे, ‘महारानीजी! आपका लाल बहुत दिनोंसे खोया हुआ था; सौभाग्यवश अब वह लौट आया, यह हम सबका दुःख दूर करनेवाला है। बहुत दिनोंतक भूमण्डलकी रक्षा करेगा ॥ ५१॥

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