श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.50

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

पयःस्तनाभ्यां सुस्राव नेत्रजैः सलिलैः शिवैः।

तदाभिषिच्यमानाभ्यां वीर वीरसुवो मुहुः॥ ५०

payaḥstanābhyāṃ susrāva netrajaiḥ salilaiḥ śivaiḥ|

tadābhiṣicyamānābhyāṃ vīra vīrasuvo muhuḥ|| 50

अर्थ

वीरवर विदुरजी! वीरमाता सुनीतिके स्तन उसके नेत्रोंसे झरते हुए मंगलमय आनन्दाश्रुओंसे भीग गये और उनसे बार-बार दूध बहने लगा॥ ५०॥

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