श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.9.46

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सुरुचिस्तं समुत्थाप्य पादावनतमर्भकम्।

परिष्वज्याह जीवेति बाष्पगद्गदया गिरा॥ ४६

surucistaṃ samutthāpya pādāvanatamarbhakam|

pariṣvajyāha jīveti bāṣpagadgadayā girā|| 46

अर्थ

छोटी माता सुरुचिने अपने चरणोंपर झुके हुए बालक ध्रुवको उठाकर हृदयसे लगा लिया और अश्रुगद्गद वाणीसे ‘चिरंजीवी रहो’ ऐसा आशीर्वाद दिया॥ ४६॥✎ 1962

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1962 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): आसुओंकी → आँसुओंकी

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